MP News: मध्यप्रदेश के हजारों अतिथि शिक्षकों के लिए बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा हाल ही में जारी किया गया सख्त आदेश अब वापस ले लिया गया है। इस फैसले के बाद प्रदेशभर के अतिथि शिक्षकों ने राहत की सांस ली है क्योंकि लगातार 7 दिन अनुपस्थित रहने पर रिलीव करने का आदेश अब लागू नहीं रहेगा।
क्या था पहले जारी हुआ सख्त आदेश
लोक शिक्षण संचालनालय मध्यप्रदेश ने 20 फरवरी को एक निर्देश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि जो अतिथि शिक्षक लगातार एक सप्ताह तक स्कूल नहीं आते उन्हें पोर्टल पर दर्ज अटेंडेंस के आधार पर तत्काल कार्यमुक्त किया जाए। विभाग का तर्क था कि नियमित शिक्षकों के रिक्त पद और अवकाश की स्थिति में पढ़ाई प्रभावित न हो इसलिए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है।
आदेश में यह भी कहा गया था कि यदि स्कूल प्रभारी या प्राचार्य लंबी अनुपस्थिति के बावजूद कोई कदम नहीं उठाते तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। पोर्टल आधारित अटेंडेंस के आधार पर एक सप्ताह से अधिक गैरहाजिर शिक्षकों को तुरंत हटाने के निर्देश दिए गए थे और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही गई थी।
प्रदेशभर में हुआ विरोध
इस आदेश के सामने आते ही प्रदेश के अतिथि शिक्षकों में नाराजगी फैल गई। उनका कहना था कि कई बार व्यक्तिगत कारणों या तकनीकी दिक्कतों की वजह से पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं हो पाती और ऐसे में सीधे सेवा समाप्ति जैसा कदम बहुत कठोर है। अलग अलग जिलों से विरोध की आवाज उठी और इसे वापस लेने की मांग की गई।
26 फरवरी को आदेश हुआ निरस्त
विरोध के बाद 26 फरवरी को नया पत्र जारी करते हुए पहले वाला आदेश तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि एजुकेशन पोर्टल 3.0 पर आवश्यक तकनीकी व्यवस्था उपलब्ध होने के बाद इस विषय में अलग से नए निर्देश जारी किए जाएंगे।
इस फैसले के बाद फिलहाल अतिथि शिक्षकों को राहत मिल गई है। अब आगे की कार्रवाई पोर्टल अपडेट और नई गाइडलाइन के आधार पर तय होगी। शिक्षा विभाग का यह कदम यह संकेत देता है कि प्रशासन ने शिक्षकों की आपत्ति को गंभीरता से लिया है और तकनीकी व्यवस्था को मजबूत करने के बाद ही आगे का निर्णय करेगा।
मध्यप्रदेश के शिक्षा तंत्र में अतिथि शिक्षक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में उनके भविष्य से जुड़ा हर निर्णय संवेद

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