टी20 विश्व कप में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मिली करारी हार के बाद भारतीय टीम को लेकर देशभर में चर्चा तेज हो गई है। ऐसे समय में भारत के दिग्गज क्रिकेटर Sunil Gavaskar ने टीम को एक अहम और सख्त सलाह दी है। उनका कहना है कि भारत को अब अपना अहंकार और अति आत्मविश्वास छोड़कर हालात के अनुसार क्रिकेट खेलना सीखना होगा।
गावस्कर का मानना है कि टी20 क्रिकेट सिर्फ हर गेंद को बाउंड्री के बाहर भेजने का खेल नहीं है। उन्होंने साफ कहा कि भारतीय बल्लेबाज क्रीज पर उतरते ही हर गेंद पर बड़ा शॉट खेलने की कोशिश कर रहे थे जबकि जरूरत समझदारी और धैर्य की थी।
परिस्थितियों के अनुसार खेलने की जरूरत
गावस्कर ने जियो स्टार से बातचीत में कहा कि भारत ने दक्षिण अफ्रीका से कोई सबक नहीं लिया। बल्लेबाजों का रवैया ऐसा था जैसे हर गेंद को सीमा रेखा के पार पहुंचाना ही लक्ष्य हो। टी20 क्रिकेट में आक्रामकता जरूरी है लेकिन हालात को पढ़ना उससे भी ज्यादा जरूरी होता है।
उनका मानना है कि जब विकेट धीमा हो या गेंदबाज लय में हों तब संयम से खेलना चाहिए। अगर टीम सिर्फ ताकत के भरोसे खेलेगी तो बड़े टूर्नामेंट में मुश्किलें बढ़ सकती हैं। उन्होंने कहा कि जीत के लिए आत्मविश्वास जरूरी है लेकिन अति आत्मविश्वास टीम को भारी पड़ सकता है।
प्लेइंग इलेवन पर भी दी राय
गावस्कर ने टीम संयोजन पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि वह अक्षर पटेल को प्लेइंग इलेवन में वापस लेने पर विचार करेंगे। खासकर तब जब जिम्बाब्वे की टीम में ज्यादा बाएं हाथ के बल्लेबाज नहीं हैं। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अर्शदीप सिंह ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ शानदार गेंदबाजी की थी और ऐसे खिलाड़ी को बाहर करना आसान फैसला नहीं होगा।
उन्होंने संकेत दिया कि टीम शायद ज्यादा बदलाव न करे और उसी संयोजन के साथ मैदान में उतरे। लेकिन उन्होंने यह जरूर कहा कि टीम प्रबंधन को हर फैसले में संतुलन और रणनीति को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सुपर 8 में भारत की स्थिति
भारतीय टीम ने अब तक टी20 विश्व कप में पांच मुकाबले खेले हैं। ग्रुप स्टेज में अमेरिका नामीबिया पाकिस्तान और नीदरलैंड्स को हराकर टीम ने शानदार प्रदर्शन किया था। लेकिन सुपर 8 के पहले ही मैच में दक्षिण अफ्रीका से 76 रन की हार ने समीकरण बदल दिए।
सुपर 8 ग्रुप 1 में वेस्टइंडीज शीर्ष पर है जबकि दक्षिण अफ्रीका दूसरे स्थान पर है। भारत का नेट रन रेट फिलहाल निगेटिव में है और जिम्बाब्वे सबसे नीचे है। ऐसे में 26 फरवरी को जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबला भारत के लिए करो या मरो जैसा हो गया है।
अगर भारत को सेमीफाइनल की दौड़ में बने रहना है तो न सिर्फ जीत बल्कि मजबूत प्रदर्शन भी जरूरी होगा। गावस्कर की सलाह इसी संदर्भ में अहम मानी जा रही है। उनका संदेश साफ है कि बड़े टूर्नामेंट में सिर्फ नाम और ताकत नहीं बल्कि समझदारी और रणनीति ही टीम को आगे ले जाती है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि भारतीय टीम अगला मैच किस मानसिकता के साथ खेलती है और क्या वह इस हार से सबक लेकर वापसी कर पाती है।

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