एमपी रिश्वत मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। मध्य प्रदेश के रतलाम जिले की जावरा तहसील स्थित नगरपालिका में रिश्वत लेने के मामले में विशेष अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। मार्च 2021 में तत्कालीन सीएमओ नीता जैन और लिपिक विजय सिंह शक्तावत को 18,500 रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया था। अब रतलाम की विशेष अदालत ने दोनों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं के तहत दोषी ठहराते हुए चार-चार साल की सजा सुनाई है।
कैसे हुआ खुलासा?
इस एमपी रिश्वत मामला की शिकायत पेटी कांट्रेक्टर पवन भावसार ने की थी। लोकायुक्त उज्जैन की टीम ने 12 मार्च 2021 को नगरपालिका कार्यालय में ट्रैप कार्रवाई की। कार्रवाई के दौरान बाबू विजय सिंह शक्तावत की जेब से 18,500 रुपए का लिफाफा बरामद हुआ। जांच में सामने आया कि यह राशि सीएमओ नीता जैन को दी जानी थी। लोकायुक्त इंस्पेक्टर बसंत श्रीवास्तव के अनुसार, रुपए मांगने की बातचीत की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध थी, जिसने केस को मजबूत आधार दिया।
एफडी रिलीज के बदले मांगा गया कमीशन
शिकायतकर्ता पवन भावसार ने कब्रिस्तान, मालीपुरा नाली, गुलशन टॉकीज सीसी रोड और रतलामी गेट की नाली जैसे निर्माण कार्य किए थे। कार्य के बदले 1,23,000 रुपए की सिक्योरिटी एफडी जमा थी, जिसमें लगभग 60,000 रुपए का भुगतान लंबित था। आरोप है कि एफडीआर रिलीज करने के लिए 3 प्रतिशत कमीशन मांगा गया। बातचीत बाबू के माध्यम से हुई और करीब 20,000 रुपए में सौदा तय हुआ। इसके बाद भावसार ने रिकॉर्डिंग के साथ लोकायुक्त में शिकायत दर्ज कराई, जिससे एमपी रिश्वत मामला उजागर हुआ।
ट्रैप के बाद भी पद पर बनी रहीं सीएमओ
इस एमपी रिश्वत मामला का एक चौंकाने वाला पहलू यह भी रहा कि ट्रैप के बाद स्थानांतरण आदेश जारी होने के बावजूद वह दबा रहा। नीता जैन करीब पांच महीने तक जावरा नगरपालिका में पद पर बनी रहीं और फाइलों पर हस्ताक्षर करती रहीं। लोकायुक्त के समक्ष पेशी में भी देरी हुई। आखिरकार 17 जुलाई 2021 को तत्कालीन कलेक्टर ने उन्हें कार्यमुक्त किया।
अब अदालत के फैसले ने यह संदेश दिया है कि भ्रष्टाचार के खिलाफ कानून सख्त है और दोषियों को सजा मिलकर रहेगी।

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