India US Trade Deal : इंडिया–अमेरिका व्यापार समझौता किसान विरोध अब राष्ट्रीय स्तर पर तेज होता नजर आ रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने अंतरिम भारत–अमेरिका व्यापार समझौते को “किसान विरोधी” बताते हुए इसे तत्काल रद्द करने की मांग की है। नई दिल्ली में आयोजित ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद जारी बयान में संगठन ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से अपील की कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस समझौते पर हस्ताक्षर न करने का निर्देश दें।
बजट सत्र से पहले देशभर में सभाएं
एसकेएम ने घोषणा की है कि 9 मार्च से शुरू होने वाले बजट सत्र से पहले देशभर में सार्वजनिक बैठकों का आयोजन किया जाएगा। इन सभाओं के जरिए किसानों को समझौते के संभावित प्रभावों के बारे में जागरूक किया जाएगा और समर्थन जुटाया जाएगा। संगठन ने यह भी कहा कि एक खुला पत्र राष्ट्रपति को भेजा जाएगा, जिसमें वाणिज्य मंत्री को हटाने की मांग की जाएगी। किसान नेताओं का आरोप है कि इस समझौते से कृषि और डेयरी क्षेत्र को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के लिए खोलने की कोशिश की जा रही है, जिससे देश की आत्मनिर्भरता और संप्रभुता प्रभावित होगी।
वित्त मंत्रालय के पत्र पर भी आपत्ति
एसकेएम ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से भी तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। संगठन ने केरल सरकार को भेजे गए उस पत्र को वापस लेने की मांग की, जिसमें गेहूं और धान पर बोनस नीति की समीक्षा और संभावित समाप्ति का सुझाव दिया गया था। किसान नेताओं का कहना है कि यह राज्यों की वित्तीय स्वायत्तता पर हमला है और किसानों को उचित मूल्य से वंचित करने का प्रयास है।
राज्यों से समर्थन की अपील
किसान संगठन के प्रतिनिधिमंडल 27 फरवरी को या उसके बाद संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विपक्ष के नेताओं से मुलाकात करेंगे। वे उनसे इस समझौते का विरोध करने और संघीय अधिकारों की रक्षा करने की अपील करेंगे। स्पष्ट है कि इंडिया–अमेरिका व्यापार समझौता किसान विरोध आने वाले दिनों में राजनीतिक और आर्थिक बहस का बड़ा मुद्दा बन सकता है।

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