पुणे में सामने आए Rs 22 Crore Cyber Fraud ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया है। इस मामले में साइबर अपराधियों ने प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खोले गए बैंक खातों को ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में इस्तेमाल कर 85 वर्षीय बुजुर्ग से 22 करोड़ रुपये की ठगी की। यह पुणे के इतिहास की सबसे बड़ी व्यक्तिगत साइबर ठगी मानी जा रही है। पीड़ित, जो हरियाणा मूल के सेवानिवृत्त औद्योगिक सलाहकार हैं, ने 19 जनवरी 2026 को साइबर थाने में एफआईआर दर्ज कराई।
शेयर ट्रेडिंग के नाम पर जाल
पुलिस के अनुसार, अक्टूबर 2025 में ऑनलाइन ठगों ने पीड़ित से संपर्क कर शेयर बाजार में ऊंचे रिटर्न का लालच दिया। उन्हें “Special Training Team B” नामक व्हाट्सऐप ग्रुप में जोड़ा गया और एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराई गई। आरोपी खुद को शेयर बाजार विशेषज्ञ बताकर अलग-अलग खातों में निवेश के नाम पर रकम ट्रांसफर कराते रहे।
27 अक्टूबर से 9 जनवरी के बीच करीब 80 ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के माध्यम से कुल 22.03 करोड़ रुपये पीड़ित और उनकी पत्नी के खाते से ट्रांसफर हुए। फर्जी ऐप पर 45 करोड़ रुपये का लाभ दिखाया गया, लेकिन जब निकासी की कोशिश की गई तो अतिरिक्त 4 करोड़ रुपये मांगे गए। तभी पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ।
जन-धन खाते बने म्यूल
जांच में सामने आया कि सात बैंक खातों में यह राशि ट्रांसफर हुई, जिनमें से कुछ प्रधानमंत्री जन-धन योजना के तहत खुले थे। राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल के अनुसार, इन खातों का उपयोग लगभग 80 हजार संदिग्ध लेनदेन में हुआ। पुलिस ने अब तक आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें म्यूल अकाउंट धारक और हैंडलर शामिल हैं।
हवाला और विदेश कनेक्शन
पुलिस जांच में यह भी पता चला कि एटीएम से नकदी निकालकर हवाला के जरिए आगे भेजी गई। कुछ रकम विदेशों में भी ट्रांसफर की गई, जिसकी जांच जारी है। पुलिस ने विभिन्न एटीएम के सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल रिकॉर्ड खंगाले हैं। फिलहाल 3.28 करोड़ रुपये फ्रीज किए जा चुके हैं।
Rs 22 Crore Cyber Fraud ने एक बार फिर डिजिटल निवेश के नाम पर फैल रहे जालसाजी के खतरे को उजागर किया है। पुलिस शेष आरोपियों और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की तलाश में जुटी है।

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